Monday, April 10, 2017

वाह! रजीबा वाह!

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एक दिन
खूब हँसी आई
और बिना बात के
हँसते-हँसते मर गया
तो देखा बीवी विधवा हो गई
तो बेटा टुअर
माँ-पिता और भाई
निहत्थे हो गए
रिश्तेदारों को मेरी कमी खली
दोस्तों को नींद नहीं आई
गुरुजनों को निराशा हुई

और इस तरह
मरने के बाद का एक दिन
चुपचाप गुजर गया!

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