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युवा पाठशालाओं का ‘साइड इफेक्ट’

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जनतांत्रिक समाज का नवीन प्रवर्तक कहा जाने वाला भारतीय युवा सांविधानिक इकाई का महत्त्वपूर्ण घटक है। देश-चिंतक राममनोहर लोहिया ऐसे युवाओं के लिए ‘तेजस्वी’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं जो अर्थगत दृष्टि से सार्थक और समर्थ जान पड़ता है। राष्ट्रीय मानव-संपदा के रूप में भारतीय युवा देश की अंदरूनी ताकत और श्रेष्ठता का पर्याय हैं। विश्वविद्यालय ऐसे युवाओं के लिए चेतनशील केन्द्र है। भारतीय विश्वविद्यालयों में सामाजिक-सांस्कृतिक श्रेष्ठता का रचनात्मक प्रयोग होते हुए आसानी से देखा जा सकता है। शैक्षिक विरासत की धरोहर कोलकाता, मुंबई और चेन्नई स्थित विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त बनारस, इलाहाबाद, हैदराबाद, पटना, दिल्ली, डिब्रूगढ़, पुंडूचेरी, अलीगढ़ इत्यादि; इस दृष्टि से मुकम्मल साक्ष्य प्रस्तुत करते हंै।
इसके अलावे चिकित्सा, अभियंत्रिकी, खनन, प्रबंधन, पर्यटन, फैशन एवं मीडिया जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रतिष्ठित संस्थानों की आमद बढ़ने से युवाओं का रूख तेजी से इस ओर बढ़ा है। न्यू मीडिया, मल्टीमीडिया, कंप्यूटर, साॅफ्टवेयर, बीपीओ आदि ने देश के उन युवाओं को तेजी से आकृष्ट किया है जो कर्मठ, महत्त्वाकांक्ष…