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सिनेमाई ज़मीन पर ‘फ़सल’ का सफल प्रदर्शन

कपोल-समीक्षा

बीते पखवाड़े रिलीज हुई फिल्म ‘फ़सल’ ने रिकार्डतोड़ लोकप्रियता हासिल की है। सिनेमाघरों और मल्टीकाम्पलेक्सों में फिल्म-टिकट को लेकर भारी गहमागहमी और हाउसफुल की स्थिति है। बेहद पेशेवर माने जाने वाले ख़बरिया-चैनल भी इस फिल्म को पूरी गंभीरता के साथ नोटिस ले रहे हैं। चौबीसों घंटे समाचार प्रसारित करने वाले इन निजी चैनलों पर घंटों चर्चाओं का दौर चल रहा है। हिन्दी मीडिया के साथ-साथ अंग्रेजी मीडिया ने भी इस फिल्म को ‘ऐतिहासिक फिल्म’ कहा है जिसने भारतीय किसानों की वास्तविक स्थिति और विडम्बना को हू-ब-हू सिनेमा के परदे पर उतारने का जोखिम उठाया है।

वहीं युवा निर्देशक राजीव रंजन जो अपनी इस पहली फिल्म के प्रदर्शन को लेकर बेहद चिन्तित थे; इस घड़ी निश्चिंत मुद्रा में अपनी फिल्म से जुड़ी ख़बरों को देख-सुन एवं गुन रहे हैं। बॉलीवुड-बाज़ार में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाला मीडिल क्लास इस फिल्म को इस तरह सर आँखों पर बिठा लेगा; यह भरोसा खुद निर्देशक राजीव रंजन को नहीं था। हाई-प्रोफाइल जीवनशैली को परदे पर देख हर्षित-रोमांचित होने का आदी बन चुका मध्यवर्ग फिल्म ‘फसल’ को देखकर ऐसी अप्रत्याशित ए…