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Showing posts from 2017

यह लाइक वाले बात पर इतना बल इसलिए क्योंकि...!

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एक अनुसंधित्सु की हैसियत से जबआठसालएकव्यक्तिकेपीछेभागेहों।जिसकेशादीरचानेकीख़बरसेलेकरगर्लफ्रेंडकेसाथदिखनेतककेसनसनीखेजजर्नलिज़्मकाआस्वादलियाहो; उसकेबारेमेंकितनाभीकमतोक्या-क्यानहींजानतेहोंगेआप?
मैंने 2009 मेंयुवाराजनीतिज्ञोंपरशोध-कार्यशुरूकीतोमेरेशोधका ‘की-वर्ड’ था-युवाराजनीतिज्ञ संचारक।राहुलगाँधीकोमैंनेजबभीट्रैसकरनाचाहा, वेमेरेप्रशंसाकेघेरेसेबाहररहे।इतनाअधिककच्चापनऔरउनकेबोलनेमेंबेशऊरपनथाकिमैंउनकीबजायनरेन्द्रमोदीकोबेहतरऔरबढ़ियासंचारकमानतारहा।अरविन्दकेजरीवालशुरूसेखटकतेरहे।उनकामतलबीपनअक्सरज़ाहिरहोतारहा।अख़िलेश

एक लाइक मँजते राहुल के लिए

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राहुलगाँधीनेअपनाथिंकटैंकऔरपीआरसमूह बदलातोउनकीभाषाऔरकहनकातेवरतकबदलगया।इसकेलिएराहुलगाँधीखातिरएकलाइकतोबनताहै।
आप खुद भी देखें कि राहुल गुजरात में असफल रहे, तो भी 2019 में उनका प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व का पर्याय बन जाना संभव है। वह मानकर चलें कि 2019 के आम लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें जबर्दस्त कामयाबी नहीं मिलेगी। वैसे भी उनके पास अभी इस घड़ी खोने के लिए कुछ भी नहीं है।
राहुल गाँधी की निंदा-आलोचना हो चुकी है। अब उनके बनने के दिन हैं। वह अपने ऊपर इसी तरह संयम रखे और नियंत्रित बोलें। वह आजकल जिस तरीके से रूक-थम और नाप-तौल कर बोल रहे हैं, उससे उनके बोल की अर्थवत्ता और कहन का प्रभाव बढ़ा है। अतएव, वह फैसले ही न लें बल्कि देश के समक्ष वह निर्णायक फैसले लेते हुए दिखे भी। मणिशंकर अय्यर प्रकरण में उनकी पहलकदमी काबिलेतारीफ़ है।
इधर बीच मोदी जी बुलेट-ट्रेन के बरास्ते सी-प्लेन में यात्रा कर रहे हैं। और यह वह उपलब्धि है जिसके लिए जनता को आजीवन नतजानु-शतजानु होना चाहिए। असल बात तो यह है कि, 2019 तक मोदी जी के ख़िलाफ कोई सीधी कार्रवाई, आरोप-प्रत्यारोप आदि नहीं होने चाहिए। पूर…

नरेन्द्र मोदी ने खुद को माना ‘ब्लू व्हेल’ का मास्टर माइंड, कहा जाल में फँसी कांग्रेस

समझ में नहीं आता। समझ की दोष है या समझदारी का। आखि़र ‘थिंक टैंक’ द्वारा इतना ख़राब इनपुट कौन देता है माननीय प्रधानमंत्री को....!
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आइए जानें क्या है ‘ब्लू व्हेल’

(जल्द ही विस्तारपूर्वक जानिए इस खेल के आतंक के बारे में....)

संचार-भाषा-प्रौद्योगिकी और भारतीय शिक्षा

§राजीवरंजनप्रसाद ()
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भूमिका : दो दशक पूर्व की कहानी कुछ और थी। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन जन-अभियान का हिस्सा था। भारत में शिक्षा-सुधार की दिशा में आधारभूत संरचनाएँ  खड़ी की जा रही थी। आज नई शिक्षा नीति, सर्व शिक्षा अभियान, ज्ञान आयोग की स्थापना इत्यादि की कड़ी में तकनीकी-प्रौद्योगिकी आधारित कई अन्य चीजें जुड़ चुकी हैं। यही नहीं आजकल हर तरफ ‘डिजिटलाइजेशन’ पर बल है। तकनीकी-प्रौद्योगिकी आधारित संचार-साधनों एवं संवादी-तंत्रों के प्रयोग किए जाने पर जोर है। यह बदलता हुआ भारत है जिसमें कौशल-विकास के माध्यम से भारतीय शिक्षा में अपेक्षित बदलाव लाने की कोशिश जारी है। यानी आज शिक्षा-तंत्र बदलाव के मुहाने पर है। यह बदलाव स्वतंत्र सोचने और बेहतर करने हेतु लगातार प्रेरित कर रहा है। हम इस सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि कौशल-विकास के माध्यम से शिक्षा में सुधार कैसे हो? भारत का अकादमिक जगत अधिकाधिक नवाचारी और अन्तरानुशासनिक कैसे बने? भारत ‘बौद्धिक सम्पदा अधिकार’ (इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट) का अधिकारी कैसे हो? विशेषकर उच्च शिक्षा में बुनियादी बदलाव के सिक्के चल सके; विश्वविद्यालय मौलिक…