Posts

जाति का आलोचनात्मक समाजशास्त्र : वर्तमान पूँजीवादी परिप्रेक्ष्य में

Image
--------------  अजनबी भाषा के तौर पर अंग्रेजी में लिखना और बोलना यदि हमारे राष्ट्रीय चरित्र का प्रमाण-पत्र हो सकता है, तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों और पूँजीवादी ताकतों द्वारा भारतीयता का प्रचार जिस तरीके से किया जा रहा है; वह ग़लत कैसे है...इस कुतर्क पर संवेदनशील होकर विचार करना आवश्यक है। ........................ राजीवरंजनप्रसाद





भारतकीधार्मिकमान्यताएँअतिप्राचीन हैं, इसलिए उनके पूरे सच होने की गारंटी नहीं दी जा सकती है।लोकमान्यताहैकिभारतीयमनीषापंचस्कन्धसेपूरितथीं।यहधार्मिकविलक्षणतापंचस्कन्ध(देशगत, कालगत, आकारगत, विषयगतऔरगतिगत) कहे