Monday, July 27, 2015

गांडीव उठाओ एकलव्य!



यह मेरी लड़ाई है और इसे अकेले मुझे ही लड़ना चाहिए। कोई साथ दे, बहुत अच्छा...न दे, तो अपने दीपक की बाती स्वयं बनो।

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प्रतिष्ठा में,

डाॅ. सी. उल. प्रभावथी
कार्यकारी कुलसचिव,
बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय।

विषयः लोक शिकायत आवेदन पत्र (Reg. No. PRSEC/E/2015/01128 dated 06 Feb 15) के सन्दर्भ में बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा ग़लत एवं निराधार सूचना दिए जाने के विरुद्ध प्रेषित शिकायत-पत्र के सम्बन्ध में अनुस्मारक-पत्र।
(शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद को प्रेषित पत्र(CUB/PG/11/2015े विशेष सन्दर्भ में)

आदरणीय महोदया,

1. सादर निवेदन के साथ आपको इस उपर्युक्त विषय के सन्दर्भ में यह अवगत कराना है कि लोक शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद ने  बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति जी को दिनांक 01 जुलाई, 2015 को अपने पास उपलब्ध सारे प्रामाणिक साक्ष्य ई. मेल के साथ प्रेषित किया हुआ है। इस ई. मेल की एक प्रतिलिपि आपको भी उसी के साथ भेजी गई है जिसका आपने अभी तक कोई प्रत्युत्तर लोक शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद को नहीं दिया है। 

2. आपके द्वारा कोई जवाबी उत्तर न दिए जाने की स्थिति में लोक शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इस आशय का जिक्र करते हुए अपना एक ई. मेल श्री रामजी पाण्डेय(यू/एस)
अवर सचिव, मानव संसाधन विकास मंत्रालय(सूचना प्रकोष्ठ), उच्च शिक्षा विभाग को सम्प्रेषित किया है जिसका उचित माध्यम से उन्होने लोक शिकायतकर्ता को उत्तर देते हुए यह सूचना दी है कि इस मामले से सम्बन्धि एक ई. मेल दिनांक 19 जुलाई, 2015 को सीधे आपको भेजा गया  है।

3. महोदया, आपके द्वारा इस मामले में बरती जाने वाली किसी भी असंवेदनशीलता से लोक शिकायतकर्ता को भारी क्षति होगी। अपने छह साल के अथक मेहनत से किए गए शोध-कार्य  और अपने शोधावधि के अंतिम क्षणों में शिकायतकर्ता बेहद तनावग्रस्त एवं मानसिक-शारीरिक पीड़ा में है। 

4. लोक शिकायतकर्ता बिहार केन्द्रीय विश्वविद्याालय की इस उपेक्षा से बुरी तरह उत्पीडि़त है और शोध-कार्य के प्रति लोक शिकायतकर्ता की गंभीर एवं अध्ययनजीवी चाव/अभिरुचि समाप्तप्राय हो चुकी है। 

5. महोदया, उपर्युक्त प्रसंग के समाधान हेतु आपकी त्वरित कार्रवाई न केवल अपेक्षित है, अपितु लोक शिकायतकर्ता बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के इस अन्यायपूर्ण रवैए तथा नैतिक दुराचरण के एवज में सिर्फ और सिर्फ अपनी सीधी नियुक्ति किए जाने की शर्त रखता है। 

6. इसके अतिरिक्त यह भी कि लोक शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद को सीएमएस(CMS) विषय के अन्तर्गत सन् 2012 में विज्ञापित सहायक प्राध्यापक पद के तहत क्षतिपूर्ति रूप में तत्काल नियुक्ति दी जाए वह भी इस पद में नियुक्त हुए सहायक प्राध्यपकों की पदभार-ग्रहण की तारीख से दी जाए।

7. महोदया, लोक शिकायतकर्ता को पूरा विश्वास है कि आप उसकी पीड़ा एवं इस दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम का उचित निपटारा कर सकने में सक्षम होंगी और लोक शिकायतकर्ता को अपनी फरियाद लेकर पुनश्चः राष्ट्रपति कार्यालय अथवा न्यायालय से याचना करने से बचा लेंगी।

सादर,

शिकायतकर्ता/आवेदनकर्ता
राजीव रंजन प्रसाद
प्रयोजनमूलक हिन्दी
वरिष्ठ शोध अध्येता(जनसंचार एवं पत्रकारिता)
हिन्दी विभाग
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
वाराणसी-221 005

Saturday, July 11, 2015

यह तो अपनी लड़ैया रे!

लोक शिकायत आवेदन पत्र (Reg. No. PRSEC/E/2015/01128 dated 06 Feb 15) के सन्दर्भ में बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा ग़लत एवं निराधार सूचना दिए जाने के विरुद्ध शिकायत-पत्र।

Rajeev Ranjan rajeev5march@gmail.com

AttachmentsJul 9 (3 days ago)
to ramjipandey.edu
प्रतिष्ठा में,

श्री रामजी पाण्डेय(यू/एस)
अवर सचिव
मानव संसाधन विकास मंत्रालय(सूचना प्रकोष्ठ)
उच्च शिक्षा विभाग
515-B, कैब-1, शास्त्री भवन
नई दिल्ली-110001

विषयः लोक शिकायत आवेदन पत्र (Reg. No. PRSEC/E/2015/01128 dated 06 Feb 15) के सन्दर्भ में बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा ग़लत एवं निराधार सूचना दिए जाने के विरुद्ध शिकायत-पत्र।

मान्यवर,

1. मुझे प्रसन्नता है कि शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद द्वारा उपर्युक्त विषय के सन्दर्भ में राष्ट्रपति कार्यालय को प्रेषित लोक शिकायत आवेदन पत्र (Reg. No. PRSEC/E/2015/01128 dated 06 Feb 15) को बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने अपने संज्ञान लिया है। 
2. इस सन्दर्भ में विश्वविद्यालय ने विधिवत जांच-समीक्षा एवं अवलोकन-विश्लेषण के पश्चात इसलोक शिकायत के निपटारा सम्बन्धित पत्र(CUB/PG/11/2015) शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद को प्रेषित करने का महती कार्य किया है; यह पत्र शिकायतकर्ता को दिनांक 30 जून 2015 को प्राप्त हुए हैं। इस पत्र की एक प्रतिलिपि आप तक भी अग्रसारित की गई है।
3. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने शिकायत सम्बन्धी उपलब्ध साक्ष्यों अथवा अभिलेखों के जांचोंपरान्त जो निर्णय सुनाया है; वह पूरी तरह ग़लत और निराधार है। इसके विरुद्ध उपयुक्त एवं पर्याप्त साक्ष्य मेरे पास मौजूद है।
4. ध्यातव्य है कि मैं अपने पास उपलब्ध सभी साक्ष्य एवं अभिलेख आपको इस ई-मेल के साथ संलग्न कर भेज रहा हूं जिसमें बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा मुझे प्राप्त हुआ पत्र भी संलग्न है। इसके अतिरित मैंने प्राप्त पत्र के प्रत्युत्तर में जो ई-मेल बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय को दिनांक 01 जुलाई, 2015 को ई-मेल द्वारा भेज चुका हूं, उसकी पीडीएफ फाइल भी संलग्न कर आप तक भेज रहा हूं।
5.अपने शोध-कार्य के अंतिम पड़ाव पर इस प्रकरण ने मुझे न सिर्फ शारीरिक-मानसिक पीड़ा पहुंचाई है बल्कि अपने शोध-निर्देशक के साथ बने सुमधुर रिश्ते को भी प्रभावित कर डाला है। 
6. बेहद पिछड़े इलाके और सामान्य शिक्षित घर से होने के कारण मैं व्यक्तिगत तौर पर इस सन्दर्भ में आगे कुछ भी प्रकियागत कार्रवाई कर पाने में असमर्थ महसूस कर रहा हूं।
7. मैं श्रीमान् को बताना चाहता हूं कि बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय से शुरू हुई मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना कई केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के साक्षात्कार के अन्तर्गत घटित हुई। इसके बाद अकादमिक सक्रियता को अपने ‘ज्ञान, क्रिया और इच्छा’ के संसक्ति के बलबूते आगे जारी रख पाना मुझे लगभग असंभव-सा प्रतीत हो रहा है।
8. श्रीमान् यदि दुनिया ऐसी ही चलती है, जनतंत्र का अर्थ वास्तव में इसी तरह परिचालित होता है, शोध-कार्यों का मूल्यांकन काम देखखकर नहीं नाम और जाति से उत्कृष्ट घोषित किया जाता है, तो सचमुच अपनी भाषा और शब्दों में रोने-धेने का न कोई सार्थकता समझ में आती है और न ही औचित्य पता चलता है। अतः इसे बदला जाना अत्यन्त आवश्यक है।
9. यह और बात है कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने शोध-कार्य के अन्तर्गत मुझे शोध-अध्येतावृत्ति में अतिशय विलम्ब और मनमाने तौर-तरीके से बुरी तरह परेशान किया। अब मुझे लगने लगा है कि सारा दोष स्वयं का है क्योंकि मेरा मन-मस्तिष्क ग़लत ढर्रे को चुनने से इंकार कर देता है जो अंततः मेरे लिए घोर यातना का कारण बनती हैं। यह सोच पहले नहीं थी, अब बनने लगी है।
10. अंत में मैं अपनी ओर से एक मानवीय गुहार लगा रहा हूं कि मुझे तत्सम्बन्धी प्रकरण में उचित न्याय दिलाया जाए, मेरा भी पक्ष् सुना जाए, मेरे पास उपलब्ध साक्ष्यों/सबूतों या अभिलेखों की यथोचित जांच कराई जाए; ताकि इस तरह की घोर यातना और असह्य पीड़ा से दूसरे शिकायतकर्ता/आवेदनकर्ता बच सकें।

श्रीमान् मेरे पिता और पूरे परिवार की तरह आप भी अपने सुपुत्र-सुपत्रियों से काफी अपेक्षाएं रखते होंगे; कृपया मेरे घरवालों के अटूट विश्वास की लौ और मेरे अडिग संस्कार को इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की बलि न चढ़ने देंगे, ऐसी मैं आशा रखता हूं।
सादर,

शिकायतकर्ता/आवेदनकर्ता
राजीव रंजन प्रसाद
प्रयोजनमूलक हिन्दी
वरिष्ठ शोध अध्येता(जनसंचार एवं पत्रकारिता)
हिन्दी विभाग
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
वाराणसी-221 005

Monday, July 6, 2015

बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय...जरा तो शर्म करते!!!



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यह ओरहन नहीं है, मुख़ालफ़त है। मैं यह लड़ाई जारी रखूं, तो शायद लोग सोचेंगे कि क्या फर्क पड़ेगा इससे? लेकिन मुझ पर फर्क पड़ेगा कि मैं एक सच्चे, स्वाभिमानी और आत्मविश्वासी आवेदक/शिकायतकर्ता के रूप में अपनी अस्मिता और पहचान बचा ले जाउंगा। यही मेरे लिए अमूल्य धरोहर है, पूंजी है। 
सादर,
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फिलहाल अकादमिक भूमिका तत्काल प्रभाव से मौन में तब्दील!!!
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Rajeev Ranjan rajeev5march@gmail.com

AttachmentsJul 1 (5 days ago)
to vcrecruitmentregistrar
प्रतिष्ठा में,

प्रो. देबदास बनर्जी
(मैसाच्यूट्स इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी से पोस्ट-डाॅक्टरेट फेलो के रूप में सम्बद्ध)
कुलपति
बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय

विषय: सहायक प्राध्यापक के नियुक्ति के सम्बद्ध में लोक शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद को बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त आपके पत्रांक संख्या CUB/PG/11/2015 के सन्दर्भ में।

मान्यवर,

1. मुझे प्रसन्नता है कि शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद द्वारा उपर्युक्त विषय के सन्दर्भ में राष्ट्रपति कार्यालय को प्रेषित लोक शिकायत आवेदन पत्र (Reg. No. PRSEC/E/2015/01128 dated 06 Feb 15) को बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने अपने संज्ञान लिया है। 

2. इस सन्दर्भ में विश्वविद्यालय ने विधिवत जांच-समीक्षा एवं अवलोकन-विश्लेषण के पश्चात इसलोक शिकायत के निपटारा सम्बन्धित पत्र(CUB/PG/11/2015) शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद को प्रेषित करने का महती कार्य किया है; यह पत्र शिकायतकर्ता को दिनांक 30 जून 2015 को प्राप्त हुए हैं। 

3. पत्र में सम्प्रेष्य तथ्यों/सूचनाओं से स्पष्ट है कि आपके पास तत्सम्बन्धी सभी अभिलेख मौजूद हैं और उसके जांचकर्ता के रूप में सर्वथा योग्य एवं सक्षम अधिकारी भी।

4. मुझे आश्चर्य है कि फिर इतनी बड़ी भूल को आपसबों ने कैसे होने दिया अथवा इस सम्बन्ध में किसी तियर्क-जांच(Cross Test) की आवश्यकता नहीं महसूस की।

5. यह आधुनिक रूप से सम्पन्न एवं समृद्ध बनते बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के गरिमा के अनुरूप नहीं है। विश्वविद्यालय के इस अकादमिक कार्य-संस्कृति एवं शैक्षणिक-क्रियाकलाप से मैं दुःखी हूं और आक्रोशित भी।

6. इस सम्बन्ध में मैं आपको अतिरिक्त कुठ और नहीं कहना चाहता क्योंकि वह सिर्फ शब्दों की फिजूलखर्ची होगी; इस शिकायत के निपटारे में मददगार कतई नहीं।

7. बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त पत्र के ग़लत सूचनाओं के विरूद्ध शिकायतकर्ता अपनी सीधी आपत्ति दर्ज करता है। शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद का निम्नांकित पक्ष संलग्न एवं द्रष्टव्य हैः

क) बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय को शिकायतकर्ता/आवेदनकर्ता द्वारा पंजाब नेशनल बैंक द्वारा भेजे गए चालान की आवेदक-काॅपी।(स्कैन)

ख) बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय को शिकायतकर्ता/आवेदककर्ता द्वारा भारतीय डाक के अन्तर्गत स्पीड पोस्ट से भेजे गए आवेदन पत्र एवं रेफरी रिपोर्ट की रसीद-काॅपी।(स्कैन) 

ग) बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा अपने वेबसाइट पर जारी किए गए सची का पीडीएफ जिसमें शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद का नाम पृष्ठ संख्या  8 के क्रमांक संख्या 35 के तहत आवेदन-पत्र संख्या CMS/AT.P./35 के रूप में स्पष्टतया दर्ज है।(पीडीएफ फाइल संलग्न)

8.  शिकायतकर्ता अपना पक्ष आप तक प्रस्तुत करते हुए सुसंगत न्याय एवं त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहा है। यह न कोई अभ्यर्थना है और न ही अनाधिकार चेष्टा; बल्कि अकादमिक विसंगतियों के खिलाफ़ यह एक सहज-स्वाभाविक सत्याग्रह है जिसमें मैं अपने स्वाभिमान एवं चरित्रबल को पहुूंचे ठेस का आत्म-परिहार चाहता हूं।

सादर,

शिकायतकर्ता/आवेदनकर्ता
राजीव रंजन प्रसाद
प्रयोजनमूलक हिन्दी
वरिष्ठ शोध अध्येता(जनसंचार एवं पत्रकारिता)
हिन्दी विभाग
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
वाराणसी-221 005
बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा आवेदक/शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद को भेजा गया पत्र

आवेदक/शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद द्वारा बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय को भेजा गया पंजाब नेशनल बैंक का चालान

डाक से भेजे गए आवेदन और एक रेफरी द्वारा भेजे गए कंफिडेंसियल रिपोर्ट की रसीद
साक्षात्कार में न बुलाए जाने की स्थिति में आवेदक/शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद द्वारा सीधे बिहार केन्द्रीय विश्वविद्याालय के माननीय कुलपति के सामने 7 जुलाई, 2012 को रखा गया पक्ष जबकि साक्षात्कार दो दिन बाद प्रस्तावित थे
बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए सीएमसी के सहायक प्राध्यापक पद हेतु प्राप्त सभी आवेदनों की सूची में आवेदक/शिकायतकर्ता राजीव रंजन प्रसाद का नाम पृष्ठ संख्य आठ पर क्रमांक 35 पर आवेदन संख्या CMS/AT.P./35 के साथ दर्ज है
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इतनी कारस्तानियों को झेलते हुए कौन शोध करेगा और कौन चाहेगा कि चुपचाप अपना काम करें!...कि दुनिया ऐसे ही चलती है!!!

साहित्य अकादेमी का वर्ग-चरित्र और पूर्वोत्तर में हिन्दी की खोज

साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली एवं केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय संगोष्ठी 24-25 सितम्बर, 2018 ...