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Showing posts from February, 2017

मेहरारू के नाम औपचारिक ‘थैंक्यू’

Happy Valentine Day Dear,
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बहुत दिन नहीं हुआ, नौकरी मिले। लेकिन जो मिला वह तुम्हारे कारण है। मेरी सारी योग्यता, सफलता और व्यक्तित्व-व्यवहार की धुरी हो तुम। तुम ही हो जिसने मुझे इस कदर सहनशील बनाया कि बार-बार ठोकर खाकर संभलता हूँ, उठता हूँ, और चलता हूँ।

अपनी पुरुषवादी मानसिकता को बल देता हुआ मैं वह बन गया जो मेरी इच्छा थी। पर यह अर्जित सफलता तुम्हारे अरमानों को बलि देकर हासिल है। तुमने मुझे पढ़ाने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी। तुमने बच्चों के नाज-नखरे सहे। घर की पारिवारिक जिम्मेदारी ढोयी, लेकिन मुझे कुछ न कहा। आज तनख्वाह मुझे मिलती है जबकि मेरे लिए सारी पूँजी तुमने लगाया है।

आज के दिन यह भी ‘प्राॅमिश’ की इस साल अपना पीएच.डी. पूरा कर लूँगा ताकि हमारे सर को बुरा न लगे जिनकी सहायता से इतने खराब माहौल के बीच यह छोटी सी नौकरी अंततः मिली है। इससे अधिक मुझसे उनकी कोई अपेक्षा भी नहीं है।

सीमा जिस लड़ाई को मैं लड़ा, वह थी-एक तरह की अचेतन कुंठा। एक ऐसी कमजोरी जिसका साथ किसी ने नहीं दिया। किसी ने नहीं सुना। यह हास्यास्पद है किन्तु सचाई कि ‘जनसंचार एवं पत्रकारिता’ का एक विद्यार्थी जिस…