नियति


.....

मैं अपनी भाषा में बोलता हूं और
ख़ारिज़ हो जाता हूं
यह और बात है सत्ता जो भाषा बोलती है
या जिस भाषा को बोलने का हु़क्म है उसे
मृत्यु के क्षण में
उसे उसकी भाषा में नहीं
हमारी भाषा में ही दफनाया और जलाया जाएगा!!!

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