Tuesday, January 24, 2017

समाजवादी अखिलेश: समाज, समुदाय, गोतिया, परिवार से पत्नी तक सिकुड़ती निगाहें

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जब शब्दाों से विश्वास उठ जाते हैं, तो आँखन देखी पर भरोसा बढ़ जाता है। किसी ने कहा एक चित्र एक हजार शब्दों के समतुल्य अर्थ सिरजते हैं, कहानी बयां करते हैं। 
प्रस्तुत है - राजीव रंजन प्रसाद की चित्रात्मक मनोभाषिकी।
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