नेताओं से छीनी जाएगी ‘वीआईपी स्टेटस’: नरेन्द्र मोदी



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  • प्रधानमंत्री ने बनाया राजनीतिक सुधार का जबर्दस्त ‘सुपर प्लान’
  • उन्होंने सभी राजनीतिक नेताओं से अपनी आत्मा की आवाज एक बार अवश्य सुनने को कहा।
  • अब ‘स्मार्ट सिटी की तरह स्मार्ट परसन ही होंगे राजनीतिक नेता।
  • ज़मीनी काम से बनेगा स्कोर कार्ड जिसका मूल्यांकन प्रशासनिक अधिकारी नहीं जनता करेगी।
  • सलाना 80 प्रतिशत जनता का कार्य-समर्थन जुटाना होगा राजनीतिक नेताओं को।
  • नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहले वीआपी कल्चर ख़त्म करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, अगर ऐसा न कर सका तो जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। 
  • सिर्फ नेमप्लेट होगा, गाड़ियों पर; लाल एवं नीली बत्ती तत्काल प्रभाव से हटेंगे। 
  • सार्वजनिक सड़क पर गाड़ियों का काफिला ले नहीं चल पाएंगे अब भारतीय नेता।
  • करोड़पति नेताओं को अपनी 60 प्रतिशत चल-अचल सम्पत्ति सरकारी खजाने के हवाले करने होंगे जिसे सेना की सुरक्षा हेतु इस्तेमाल किया जाएगा। 
  • अब टेलीविजन स्क्रीन पर राजनीतिक बयान देते नहीं दिखाई देंगे निर्वाचित नेता, सारा कमान राजनीतिक प्रवक्ताओं को सौंपी जाएगी।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में ‘वीआपी कल्चर’ के खि़लाफ लोगों को एकजुट होने की बात कही है। वे इस बारे में आगामी ‘मन की बात’ में अपना विचार प्रकट कर सकते हैं। प्रधानमंत्री जिस ज़मीनी बदलाव की ओर कदम बढ़ा रहे हैं वह पूरे देश का सम्पूर्ण सपना है। सरदार पटेल का दृष्टिकाण है। पंडित दीनदयाल की सोच का सच होना है। जनता इस सपने को कब साकार होते देख पाएगी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। फिर भी नरेन्द्र मोदी ने पार्टी हित और राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर कुछ अलग करने का ठाना है जो वाकई स्वागतयोग्य है।

प्रधानमंत्री ने दो-टूक लहजे में कहा है कि अब वीआईपी गाड़ियों पर नेमप्लेट के सिवा कोई चिह्न नहीं होंगे। लाल बत्ती और नीली बत्ती के चलन को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। उनका मत है कि नेताओं पर सरकारी खर्च की जगह सेना पर खर्च किया जाना राष्ट्रीयता की रक्षा और राष्ट्रीय सम्मान का सूचक है। वह अपने कैबिनेट मंत्रियों तक को इस सम्बन्ध में कोई छूट देने के मूड में नहीं है। नेताओं के संसदीय दौरे पर गाड़ियों का काफ़िला दिखने पर स्थानीय पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है अथवा जाँच कमिटी बिठा सकती है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि आजकल नेताओं के कद इतने बढ़ गए हैं कि वह जनता की अहमियत को भूल रहे हैं जिन्होंने उन्हें सत्ता सौंपी है। अधिसंख्य नेता बड़े बंगले में रहने का इस कदर आदी हो गए हैं कि उनहा ज़मीनी सरोकार न के बराबर है। जनता से संवाद न होने के कारण उनके पास जुटाए गए प्रायोजित आँकड़े, इंटरनेट से बटोरे गए रिपोर्ट और ऐसे ही शार्टकट दस्तावेज तो खूब होते हैं; लेकिन अपने निर्वाचित क्षेत्र के बारे में वास्तविक जानकारी कुछ भी नहीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने नेताओं को उनके जरूरी जवाबदेही को अहसास करने को कहा और अपने वक्तव्य में यह भी जोड़ा कि हम करोड़पति नेताओं की लम्बी फौज लगातार खड़ी करते जा रहे है जो भारतीय लोकतंत्र के बारे में अच्छी धारणा बनाने से रोकता है। हम अपने संसद का विकसित ‘माॅडल’ जनता के समझ तभी रख सकते हैं जब संसद पहुँचने वाले नेता ‘इलिट क्लास’ का नहीं हो। हम अपने करोड़पति नेताओं का बायकाट नहीं करेंगे, लेकिन उन्हें अपनी सम्पत्ति का 60 प्रतिशत भाग सरकारी खजाने में जमा करने के लिए अवश्य राजी कर लेंगे।

प्रधानमंत्री की उपर्युक्त बातें आदर्श अधिक मालूम देती हैं और इसको लेकर नेताओं में सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिल रही है। किन्तु भारत के ताकतवर अब तक के सबसे ‘डायनेमिक प्राइम-मिनिस्टर’ नरेन्द्र मोदी से यह उम्मीद अवश्य की जा सकती है; क्योंकि पूरा देश उनकी कथनी और करनी में समानता होने का कायल है। 

सैम्पल रिपोर्ट: राजीव रंजन प्रसाद
(व्यावहारिक हिंदी के विद्यार्थियों के लिए)
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