Tuesday, December 7, 2010

गश्ती पर लौटे काशी के 'भोकाली जांबाज'


धमाका हुआ तो ये सो नहीं रहे थे. डयूटी पर तैनात थे. बीड़ी-हुक्का भी नहीं पी रहे थे. ठण्ड में चाय की तलब भी इन्हें नहीं सता रही थी. फिर ये क्या कर रहे थे? काशीवासी यह सवाल इनसे पूछ रहे हैं. जवाब तो ये देंगे ही देंगे, पर आज ये क्या करिश्मा करते दिख रहे हैं? उस पर एक चलती नज़र...,

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हमने जब भी पाया, पूरा पाया...!

अपने मित्र डाॅ. लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता का चयन इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय में  सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) के पद पर  होने की खुशी मे...