Thursday, February 7, 2013

नदी


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प्यास लगी
तो बचे-खुचे धैर्य के साथ
पसरी रेत पर
जरूरतमंद रेत ने
नदी के प्यास को
अपनी प्यास की भूख समझ
खा लिया
नदी ने उफ! तक नहीं की
अंतिम क्षण तक
नदी कहती रही थी
‘मैं सिर्फ नदी नहीं हँू
हँू रेत की माँ’

घर के आँगन में
एक बेटी जन्मी है
सुना है
उसका भी नाम है-‘नदी’ 

जब तक नदी है
संभावनाएँ अनन्त हैं
और रेत के पास मौके अनगिनत।
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