नदी के दिन-दुर्दिन


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लोग झाड़ा फिरने आते थे
भिनसारे से सुबह तक
नदी की ओर

लोग नहाने आते थे
भोर होते या उदित होते सूरज संग
नदी की ओर

लोग कई-कई मर्तबा आते थे
इस-उस काम से
नदी की ओर

नदी की ओर
अब कोई नहीं आता
कहते हैं सब-‘बिन पानी की नदी किस काम की....?’


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