Thursday, September 11, 2014

शीर्षकहीन : He is no more!



---------



हे राम!
मैं फिर लौटूंगा
बार-बार लौटना चाहूँगा
उसी चोले में
जिस चोले में जिया कई बरऽस

हे राम!
मेरे ज़बान का दूध
पूरी तरह नहीं निचुड़ा है
‘शब्दों’ और ‘अर्थों’ से
भाषा का थान पिरा रहा है
अतः मैं फिर लौटूंगा
बार-बार लौटना चाहूँगा
उसी चोले में
जिस चोले में जिया कई बरऽस
Post a Comment

हमने जब भी पाया, पूरा पाया...!

अपने मित्र डाॅ. लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता का चयन इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय में  सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) के पद पर  होने की खुशी मे...