आभिजात्य-पूंजीवादी ली कुआन यू ने सिंगापुर को बनाया अमीर, इसी नक्शेकदम पर नरेन्द्र मोदी


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कुछ आप भी विचारिए। आखिर सम्पादकीय पुष्ठ पर यह समाचार इतने महत्त्व के साथ प्रकाशित क्यों हुआ है? किसी समाचारपत्र का सम्पादक पत्रकारीय दायित्व से बंधा होता है। वह कुछ भी नहीं लिख सकता है। यदि वह सच को नकारते हुए ग़लत के पक्ष में सकारात्मक चीजों को ‘प्लांट’ करता है, तो यह हमारे बहस, संवाद और विमर्श का हिस्सा होना चाहिए। और यदि नहीं, तो यह बेहूदगी की हद है जो हम खुद को पत्रकार कहने का गुमान पालते हैं, नैतिकता की दुहाई देते हैं। शब्दों के हेरफेर द्वारा शास्त्रों ने सर्वाधिक नरंसंहार और अत्याचार किया है। अब इस ‘डिस्कोर्स’ को बदले जाने की जरूरत है। 
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कथन: मेरा मानना है कि दैनिक समाचारपत्र ‘हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित आज का सम्पादकीय ‘पेड एडोटोरियल’ का नमूना है। 

सम्पादकीय सारांश : ली कुआन यू आधुनिक सिंगापुर के संस्थापक हैं। उन्होंने इस देश का कायाकल्प किया। वे तीसरी दुनिया के देशों की तरह स्वतन्त्रता सेनानी नहीं रहे थे, तीसरी दुनिया के नेताओं की तरह वे थोड़े या ज्यादा वामपंथी नहीं थे। वे पूंजीवाद के समर्थक थे। वह सिंगापुर के चीनी मूल के एक अभिजात खानदान से थे, जो अंग्रेजी बोलते थे। यू ने चीनी भाषा तब सीखा जब वे राजनीति में आए। उन्होंने पूंजीवाद के आधार पर विकास का ‘सिंगापुर माॅडल्’ तैयार किया। आज सिंगापुर गरीबीमुक्त देश है।  एक भी गंदी बस्ती नहीं है। वहां छह में से एक परिवार ‘मिलिनेयर’ है। यानी इन परिवारों के पास कम से कम दस लाख अमेरिकी डाॅलर अतिरिक्त पैसा है जिसमें इनकी अचल सम्पति नहीं शामिल है। भ्रष्ट्राचार और अन्य अपराध बहुत कम है। पुलिस विश्वसनीय और कार्यकुशल है। वह 30 साल तक सत्ता में बने रहे। यू की तानाशाही और भाई-भतीजावाद की खूब आलोचना हुई। वैसे सिंगापुर में यह आलोचना करना संभव नहीं है। वहां इस किस्म की आजादी नहीं है। यू के परिवार के सभी लोग सत्ता में बड़े पदों पर हैं और उनके बड़े बेटे अभी प्रधानमंत्री हैं। यू जब स्कूल में पढ़ते थे तब वह अपने अंग्रेज हेडमास्टर की छड़ी मारने की सजा से बहुत प्रभावित हुए और सिंगापुर में कई अपाधों के लिए छड़ी मारने की सजा का प्रावधान है। यू ने सिंगापुर में एक तानाशाह की तरह राज किया, लेकिन उनमें और अन्य तानाशाहों में एक फर्क यह रहा कि जहां ज्यादातर तानाशाहों ने अपने देश को कंगाल बना दिया, यू के राज में सिंगापुर समृद्ध होता गया।

सम्पादकीय का परोक्ष उद्देश्य : ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाले वर्तमान प्रधानमंत्री के हाल में लिए जा रहे फैसलों के विरोध करने की बजाए सिंगापुर का उदाहरण देखा जाए जो देश आज अपनी समृद्धि के उच्चतम शिखर पर है। इसे ली कुआन यू के करिश्माई छवि ने संभव कर दिया है। पूंजीवादी ढर्रे, भाई-भतीजावाद, तानाशाही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छिने जाने के बावजूद यह देश आज एक बेमिसाल उदाहरण के रूप में हमारे सामने है जिसे यू के असाधारण व्यक्तित्व ने संभव कर दिखाया है। 


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