फर्जी नेता नहीं हैं सुब्रह्मण्यम स्वामी

सुब्रह्मण्यम ने किया खुलासा, नेहरू ने करवायी सुभाषचंद्र बोस की हत्या

 http://www.prabhatkhabar.com/news/national/subramanian-swamy-jawaharlal-nehru-subhash-chandra-bose-murder-stalin-conspiracy/292848.html

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राजीव रंजन प्रसाद

मेरी दृष्टि में फर्जी नेता नहीं हैं सुब्रह्मण्यम स्वामी । अंतः जो कहा होगा बासबूत कहा होगा।  प्रभात ख़बर(यह अख़बार नवभारत टाइम्स से अधिक विश्वसनीय है) में प्रकाशित समाचार के मुताबिक-'सुभाषचंद्र बोस की हत्या नेहरू ने करवायी'।  दरअसल, हमेशा स्वदेशी का राग जपने वाली भारतीय जनता पार्टी  फिरंगी सोच की नहीं है!  वह सुभाष जी को आजादी का सच्चा नायक मानती है। वह मानती है कि सुभाष चन्द्र बोस गरीबों के समर्थक थे। वे भारतीय स्वतन्त्रता में आमजन की भूमिका को महत्त्वपूर्ण मानते थे, न कि कोट में फूल लटकाने वाले चोचलेदार नेताओं को। वह नेहरू की तरह अभिजात्य और गुलामी के दिनों में भी सम्पन्न कतई न थे।

देश की जनता को हमेशा बड़ी जाति के नेताओं ने और तथाकथित झंडाबदार स्वतन्त्रता सेनानियो ने ठगा है। इन्होंने देशवासियों में जातिगत वैमनश्यता और धार्मिक अलगाव जान-बूझकर फैलाई है और हमशा श्रेष्ठताग्रंथि से काम लिया है। ये जनविरोधी ताकतें गांधी का नाम जिंदगी भर बांचते-उलीचते रहे; लेकिन देश की गरीब जनता के लिए क्या किया है। ये लोग टाटा, अंबानी, बिड़ला के साथ देश भर में विकास का जाल बिछाते रहे और खुद सरकारी पैसे पर ऐशागह में अपनी सलामती के लिए संभावना जोहते रहे। इन्होंने हमेशा झूठ-मूठ का विकास का ठिंठोरा पीटा है; लेकिन देश के लिए किया कुछ नहीं है। इस मामले में नरेन्द्र मोदी सरकार अच्छी है। वह वादा कर रही है कि अब किसी भी पुलिस थाने में अपराध, हत्या, दुष्कर्म, लूट, भ्रष्टाचार और अन्य वारदातों के आंकड़े में इजाफा हुआ, तो खैर नहीं। यह पहली बार हो रहा है कि नेताओं को संसद में जितने दिन उपस्थित रहेंगे उतने ही दिन की तनख़्वाह देने का प्रावधान किया जा रहा है। इसी तरह दवाओं को जानबूझकर महंगे कीमत पर बेचने और लोगों को महंगी दवाएं ही खरीदने पर मजबूर करने के लिए सम्बन्धित डाॅक्टरों को दंडित करने का फ़रमान जारी करने पर विचार किया जा रहा है। पिछलें दिनों धर्म के नाम पर नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता से खफा कुछ भाजपाइयों ने जानबूझकर धार्मिक संकीर्णता फैलाने वाला कृत्य किया जिसे माननीय प्रधानमंत्री ने चपत लगाई है।

कहना न होगा कि  नेहरू राज से लेकर मनमोहन राज तक जो अराजकता और सरकारी भ्रष्टाचार की लूट थी, उसे मोदी सरकार हर हाल में जिस तरह खत्म करने के लिए कटिबद्ध दिखाई दे रही है; वह सचमुच भारत के नवनिर्माण की दिशा में ठोस कदम है। वह अपने सभी मंत्रालयों पर गहरी निगरानी रखने का हरसंभव प्रयास करती दिखाई दे रही है। इसी राह में वीआईपी कल्चर है जिसमें भारी कटौती किए जाने का संकेत अपनेआप में एक बड़ी और निर्णायक कदम है। माननीय प्रधानमंत्री ने हाल ही में हर सांसद को एक गांव लेने का नया उदाहरण पेश किया है। वह जानते है कि गांव की खुशहाली ही देश के विकास का सर्वोत्तम रास्ता है।

दरअसल, मोदी पंडितो का आदर भले करते हों, लेकिन पंडिताई की भाषा नहीं बोलते हैं। वह ज़मीनी बात करते हैं; वे ज़मीन को मां मानते हैं और वह नहीं चाहते की कांग्रेस के द्वारा पैदा की गई गरीबी को वह भी ढोए। यह पूरे देश पर कलंक है जो चेहरे पर कालिख पुते होने से अधिक गाढ़ा है। पिछले छह दशकों में कांग्रेस ने भारत की शिक्षा, स्वास्थ्य ,कृषि औ परिवहन सेवा को पूरी तरह नष्ट-विनष्ट कर दिया है। लेकिन अब नीति आयोग के अन्तर्गत नरेन्द्र मोदी ने सबको समान और समुचित शिक्षा उपलब्ध कराने का जो दावा किया है, वह जल्द ही साकार होगा। नरेन्द्र मोदी ने रेडियो पर प्रसारित अपने ‘मन की बात’ में देश की जनता से सीधे सम्पर्क किया है। वे उनसे सीधे संवाद करने के पक्षधर हैं। उन्होंने देश की जनता को सीधे प्रधानमंत्री से अपनी बात कहने का सुअवसर दिया है। वह नहीं चाहते हैं कि देश का विभाजन अमीर और गरीब दो वर्गों में हो। एक करोड़पति हो, तो एक को हजारों का भी टोटा हो। इसीलिए वे सरकारी नेताओं के सम्पतियों को भी राष्ट्र की सार्वजनिक सम्पति घोषित किए जाने की वकालत करते हैं। यदि ऐसा सच हुआ, तो एक भी ऐसा नेता न हो जो भ्रष्टाचार में संलिप्त होगा।

नरेन्द्र मोदी ने ज़मीन से राजनीति शुरू की है और वह अपना पांव हमेशा ज़मीन पर ही टिकाए रखना चाहते हैं। ऐसा नेता और नेतृत्व भाजपा ने संभव कर दिखाया है क्योंकि उसके पास सुब्रह्मण्यम स्वामी जैसे साफ छवि के तेज-तर्रार नेता हैं जिन्होंने पिछले दिनों ए. राजा को कठघरे में पहुंचाया था। इस बीच दिल्ली में भाजपा ने किरण बेदी को खड़ा किया है जो भारतीय महिलाओं की आइकाॅन/रोल-माॅडल हैं। किरण बेदी जो हमेशा जनता के बीच से सवाल उठाती रही हैं और यह पूछती रहीं हैं कि ‘ग़लती किसकी?’ यदि वह खुद शासन में आई तो दिल्ली का भला न करेंगी यह सोचा भी नहीं जाना चाहिए; क्योंकि नरेन्द्र मोदी को आदमी की परख है। और जो आदमी को सही अर्थों में पहचानना जानता है; वही जन-प्रतिनिधि कहलाने के योग्य है।

अब पूरे देश को दूसरे के कहे पर सोचने की आवश्यकता नहीं है। उसे यह देखने की जरूरत है कि वह क्या है और वह स्वयं अपनी जरूरियात पूरी कर पाने में कितना और किस प्रकार सफल है। यदि पहले से माहौल बदला है। उसकी आर्थिक चिंता दूर हुई है। बिटिया के शादी का फिक्र समाप्त हुआ है। बच्चे अपनी उम्मीद के अनुरूप पढ़ाई कर पाने का मार्ग और अवसर पा रहे हैं, तो सच जानिए कि देश में अच्छे दिन आ गए हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार ने पिछले आठ महीने में अपनी योजनाओं का दस्तावेजीकरण कर लिया है; बस अब भाजपा के नेताओं को अपना काम करना शुरू करना है।

हमें फिलहाल भाजपा के नियत और नस्ल पर शक नहीं करना चाहिए।
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