गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य पर व्यावहारिक सुभाषितानी

-------------
कहा गया है-‘विद्या सर्वाथ साधनम्’’। 
यह भी कहा गया है कि विद्या वही है जो हमें बंधन से मुक्त करती है। 
यह भी कि ‘Learn for Live’।
--------------
लेकिन इन सद्विचारों का अवगाहन, पालन और अनुसरण करने के लिए पेट में दाना चाहिए। चिड़ियां या पंक्षी भी भोजन की खोज-तलाश में आसमान-जमीन, डाल और पेड़ बदल देते हैं या बदल देने के लिए विवश होते हैं।
किसी भी मनुष्य के लिए ज़िदा होने का प्रश्न तथाकथित सुसभ्य और सुसंस्कृत मनुष्य होने से अधिक महत्त्वपूर्ण है। अतः अपनी जहां कीमत मिले काम करो और न मिले तो कहो ब...ब्बाय इंस्टिट्युशन! चाहे वह गुरुकुल ही क्यों न हो?
Happy Republic Day



Post a Comment

Popular posts from this blog

‘तोड़ती पत्थर’: संवेदन, संघात एवं सम्प्रेषण

उपभोक्ता-मन और विज्ञापन बाज़ार की उत्तेजक दुनिया

भारतीय युवा और समाज: