पत्राचार राजीव और NBT आॅनलाइन के बीच

NBT ऑनलाइन को चाहिए कॉपी एडिटर/सीनियर कॉपी एडिटर

नवभारतटाइम्स.कॉम को उपसंपादक (कॉपी एडिटर) और वरिष्ठ उपसंपादक (सीनियर कॉपी एडिटर) की जरूरत है। एनबीटी अपने लिए ऐसे साथी चाहते हैं जिन्हें काम का अनुभव हो। एनबीटी को फ्रेशर से भी कोई परहेज नहीं है, बस उनके मानकों पर खरा उतरे। जर्नलिजम में डिप्लोमा या डिग्री जरूरी नहीं लेकिन आज की पत्रकारिता क्या है, इसकी जानकारी उन्हें होनी चाहिए। दूसरे शब्दों में उनकी पत्रकारिता की दुनिया सिर्फ मोदी-राहुल-कांग्रेस-बीजेपी तक सीमित न हो बल्कि आसपास की हर खबर की भी उनको समझ हो।
हिंदी ऐसी हो कि आम पाठकों को समझ में आए और श्रीमती को श्रीमति न लिखता हो। अंग्रेज़ी का ज्ञान इतना कि सही-सही ईमेल लिख पाए और इंग्लिश से हिंदी में अनुवाद कर पाए। अंग्रेजी के शब्दों से नफरत न करता हो और डॉक्टर को डाक्टर न लिखता हो।
टेक्नॉलजी से जो न घबराता हो। टि्वटर और फेसबुक जिसके लिए दूसरी दुनिया के शब्द न हों। और इनस्क्रिप्ट/फनेटिक कीबोर्ड के अनुसार टाइप करना जानता हो।
अगर आप ऐसे हैं तो अपना रेज़्युमे (जी हां, इसे रिज़्यूम नहीं कहते) इस ईमेल अड्रेस- nbtonline@timesinternet.in पर 13 जून 2014 तक भेज दें। साथ में किसी भी पसंदीदा टॉपिक पर 500-700 शब्दों में एक लेख भी भेजें। लेख मंगल फॉन्ट में होगा तो सुविधा होगी वरना साथ में फॉन्ट भी भेजें। कुछ जानना हो तो भी इसी अड्रेस पर मेल करें। रेज़्युमे भेजने के लिए ईमेल का सब्जेक्ट रखें- copy editor/senior copy editor.
एनबीटी के लिए नए साथी की उम्र 25-28 के आसपास हो। अच्छे कैंडिडेट के लिए दो साल का ग्रेस हो सकता है।
आखिर में एक ज़रूरी बात। भूलकर भी किसी की सिफारिश न लगवाएं। ऐसा होते ही आपकी ऐप्लिकेशन 101 पर्सेंट रद्द हो जाएगी। न सिर्फ इस बार के लिए बल्कि हमेशा के लिए।
(साभार :  नवभारतटाइम्स.कॉम)
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 Wed, Jun 4, 2014 at 12:18 PM
सम्बन्धित को सम्बोधित
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महोदय/महोदया,

‘अच्छे कैंडिडेट’ होने की स्थिति में क्या आप अच्छे कैंडिडेट को दो वर्ष
से अधिक का ग्रेस(अच्छा किया, यदि हिन्दी में 'छूट' शब्द  लिखते तो समझ
में नहीं आता अच्छे कैंडिडेट को) दे सकते हैं? आजकल रेज़्युमे के नाम पर
लोग लाम-लिफाफा(यदि भारत के किसी गाँव-कस्बे में पैदा हुए हों, तो इस
शब्द के अर्थ से अवगत होंगे) बहुत करते हैं। क्या बिना रेज़्युमे भेजे भी
इस पद के लिए आवेदन किया जा सकता है?

एक और ज़रूरी बात। यदि आप बुरा न मानने वाले प्राणी हों, तो आपको बताऊँ कि
कृप्या आप अपने शब्दों के प्रयोग में एकरूपता बरतें;
यथा-अंग्रेजी/अंग्रेज़ी/इंग्लिश। अन्यथा आप भी श्रीमती को श्रीमति लिखने
या डाॅक्टर को डाक्टर लिखने वाले ‘महानुभाव’ ही अंततः साबित होंगे। अंत
में मैं अपनी ओर से आपके सेहत और प्रसन्नता के लिए ईश्वर से 101 प्रतिशत
कामना करता हूँ। सिर्फ इस बार के लिए नहीं हमेशा के लिए।

भवदीय
राजीव रंजन प्रसाद
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221 005
मो0- 07376491068
ई-मेल: rajeev5march@gmail.com

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Fri, Jun 20, 2014 at 5:59 PM 
नमस्ते,
रेज़्युमे के आधार पर यहां कोई निर्णय नहीं होता। सारी परख साथ में भेजे गए
लेख के आधार पर ही होती है। और वह लेख चोरी का है या मौलिक, इसको जांचने के
तरीके भी हमारे पास हैं। यदि इसके बावजूद कोई धोखेबाज़ लिखित परीक्षा के लिए
चुन लिया जाए तो भी वह हमारे यहां होनेवाले टेस्ट में तो पकड़ा ही जाएगा।
आपने कोई लेख नहीं भेजा इसलिए मैंने सोचा कि आपके पत्र के आधार पर ही आपकी
भाषा की परख कर लूं। आपने अंग्रेज़ी और अंग्रेजी के अंतर को देखा, इसके लिए
धन्यवाद। लेकिन अंग्रेज़ी और इंग्लिश एकसाथ नहीं लिखे जा सकते, इससे मैं सहमत
नहीं। एक ही स्टोरी में आप आरोप भी लिख सकते हैं और इल्ज़ाम भी। एक ही शब्द
बार-बार आने से पाठक को बोरियत होती है।
यदि आपने कृपया को कृप्या और आपकी सेहत और प्रसन्नता की जगह आपके सेहत और
प्रसन्नता नहीं लिखा होता तो मैं आपको इस पत्र के आधार पर ही लिखित परीक्षा
के लिए बुला लेता।
संपादक
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 Fri, Jun 20, 2014 at 11:10 PM
आदरणीय सम्पादक,
‘नवभारत टाइम्स’

महोदय,

जवाब प्रेषित करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद! इस प्रत्युत्तर को मैं अपने
शोध-कार्य से सम्बन्धित अध्यायी-अनुभाग ‘हिन्दी समाचारपत्रों द्वारा बरती
जाने वाली भाषाई संवेदनशीलता’ के अन्तर्गत सुरक्षित रख रहा हूँ। आप ने
मेरी शाब्दिक भूलों के लिए जो दण्ड दिया है, मैं उसका निश्चय ही पात्र
हूँ। अपने इस कृत्य के लिए मैं माफ़ी माँगता हूँ। भविष्य में ऐसी भूल
दोबारा न हो, इसके लिए मैं हरसंभव सावधानी बरतने की चेष्टा करूँगा। आशा
है, आप स्वस्थ एवं सानंद होंगे।
सादर,

भवदीय
राजीव रंजन प्रसाद

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