ब्लाॅग ‘इस बार’ ने कलम चलानी चाही, तो
एक शुभचिन्तक मित्र ने कहा कि यह ख़बर लिखने के लिए
लिखना है या फिर सोचने के लिए. मैं सोचने लगा.
चिन्तन अभी तक जारी है...!
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हँसों, हँसो, जल्दी हँसो!
--- (मैं एक लिक्खाड़ आदमी हूँ, मेरी बात में आने से पहले अपनी विवेक-बुद्धि का प्रयोग अवश्य कर लें!-राजीव) एक अध्यापक हूँ। श्रम शब्द पर वि...
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यह आलेख अपने उन विद्यार्थियों के लिए प्रस्तुत है जिन्हें हम किसी विषय, काल अथवा सन्दर्भ विशेष के बारे में पढ़ना, लिखना एवं गंभीरतापूर्वक स...
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--- (मैं एक लिक्खाड़ आदमी हूँ, मेरी बात में आने से पहले अपनी विवेक-बुद्धि का प्रयोग अवश्य कर लें!-राजीव) एक अध्यापक हूँ। श्रम शब्द पर वि...
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--- (चालाकीपूर्वक वही ख़बरें प्रसारित की जाती है जो तत्कालिन सरकारों को सूट करती है।) पत्रकारिता में शब्दों और वाक्यों का भर्ता बना पेश ...
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