Tuesday, May 10, 2011

असीमा

अइसन पोस्ट लिख दिहलू तू कि मन कुछ सोचे पर विवश हो गइल. हमनि के केतना आपन-आपन रटिलाऽजा. लेकिन दीदी हो तोहार बाबूजी त आपन स्वार्थ के उतारि के आपन जिन्दगी देस खातिर लगा दिहले, तोहनियो जानि आपन पापा के प्यार पाव खातिर तरस गइलूजा. खैर, हमहू खालि दिलासा देवे के और का कहि सकिला.
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हमने जब भी पाया, पूरा पाया...!

अपने मित्र डाॅ. लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता का चयन इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय में  सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) के पद पर  होने की खुशी मे...