रंग जिंदगी के

बढि़या लिखले बाड़ऽ तू आपन संस्मरण. गंवउन के लोग के गंवार कहे के चलन भले होखे. जितना प्यार रिश्तन में गांव-ज्वार में बा ओकर रति भर अंश ना मिलिहे शहरवन में. अपनापा जेतना गांव में आजो बाटे. परिवार में रचल-बसल बा मेल-बहोर आजो खूब झोंटा-झोंटी, लड़ाई-तकरार, गाली-गलौज होखै के बादो में. उ देख के गर्व होला कि हम गांव के बिटवा हनी.
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